एक बार पांडवो में धनुर्धर अर्जुन ने भगवान श्री कृष्णा से बातो ही बातो पूछ लिया , '' भगवन ये माया आखिर हे क्या ? में माया के बारे में जानना चाहता हु। उस समय भगवान श्री कृष्णा अर्जुन के प्रश्न से थोड़ा हसे और भगवान श्री कृष्णा अर्जुन से कहा की '' हे अर्जुन माया को जानने की जो इच्छा हे तुम्हारे में वो इच्छा में सही समय आने पर पूर्ण करुगा ''।→उसके बाद समय बीतता गया। कुछ समय बीत जाने के बाद अर्जुन भी माया को समझने की बात भूल गया था। लेकिन उनको पता था की भगवान श्री कृष्णा उनको माया क्या हे ?उनका ज्ञान जरूर देंगे। →एक दिन की बात हे ,भगवान श्री कृष्ण सुबह सुबह अर्जुन से कहने लगे की ,हे अर्जुन मुझे बहोत ही भूख लगी हे ,तुरंत ही भोजन की व्यवस्था की जाय I लेकिन उस वक्त खाना बना नहीं था ,इसलिए अर्जुन ने श्री कृष्णा को कहा ,भोजन के लिए थोड़ा समय लगेगा भगवन। और अर्जुन भगवान श्री कृष्णा से कहा ,की जबतक भोजन बनके तैयार हो जाये तब तक हम नदी में स्नान करके आ जाते हे।→उनके बाद भगवान श्री कृष्णा साथ में अर्जुन नदी की और स्नान करने चल पड़े। नदी में स्नान करते समय अर्जुन भगवान श्री कृष्णा से शर्त लगाते हे की पानी में ज्यादा समय कौन रहता हे। भगवान श्री कृष्णा अर्जुन की दी हुई शर्त स्वीकार कर लेते हे। और भगवान श्री कृष्णा और अर्जुन दोनों पानी में डुबकी लगाते हे। →अर्जुन अपने प्रयास से पानी में डुबकी लगाई ,कुछ समय बाद वो पानी से बहार निकला ,पानी से बहार निकलने के बाद अर्जुन आश्चर्य चकित हो गया ,अर्जुन के आसपास कोई नहीं था। न नदी ,न कृष्णा ,न कोई नदी का किनारा ,न अपनी राजधानी हस्तिनापुर ,वो अब कोनसे स्थान पर हे वो भी अर्जुन को मालूम नहीं। अपने आपको अकेला महसूस पा कर उस स्थान पर अर्जुन अकेला ही घूमने फिरने लगा। कुछ समय के अंतर के बाद अर्जुन को थोड़े दूर एक विशाल नगर दिखा। अर्जुन शीग्रता से उस नगर की और चल पड़ा। नगर के द्वार तक पहोचने के बाद अर्जुन की मुलाकात उस नगर के प्रधानमंत्री और सेनापति के साथ हुई। सेनापति और प्रधानमंत्री अर्जुन को राजदरबार में ले गई।→ राजदरबार में पहोचते ही प्रधानमंत्री ने अर्जुन के सामने एक दुखभरा निवेदन दिया। की हे श्रीमान हमारे महाराज बीती हुई रात को मृत्यु हो गई हे ,उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं हे। ये राज्य का नियम हे की राजा अगर मृत्यु हो जाये और उनका उत्तराधिकारी कोई न हो, तो उस समय प्रातः काल जो मनुष्य राज्य में पहला दिखे उसे राजा बनाया जाता हे। अर्जुन कुछ भी कह न सका,और अर्जुन को उस राज्य का राजा बनना पड़ा। उस समय अर्जुन को भगवान श्री कृष्णा और अपने राज्य हस्तिनापुर की बहोत याद आयी ,पर अर्जुन कुछ करे तो क्या करे? अर्जुन विवस था ,इस विवशता के साथ प्रधानमंत्री के आग्रह से अर्जुन की सादी भी हो गई। और अर्जुन राजा बनके सुंदर पत्नी के साथ राज करने लगा। समय बीतने के बाद अर्जुन की पत्नी को एक के बाद एक तीन पुत्र भी हो गई। अर्जुन का परिवार और राज्य बहोत अच्छी तरह से चलने लगा।→थोड़े कुछ वर्ष के बाद ,दुर्भाग्य के वश अर्जुन की पत्नी की मृत्यु हो गई। महारानी के शब को श्मशान घाट ले जाया गया। अर्जुन और राज्य की प्रजा बहोत दुखी थी। अर्जुन जब श्मशान घाट में देखा तो उनको बहोत आश्चर्य हुवा ,कारन वो था की श्मशान घाट में दो चिताओका निर्माण हुवा था। अर्जुन कुछ सोचता उससे पहले महारानी का शब को एक चिता पे रख दिया। और दूसरी चिता पे अब अर्जुन को बिठाना था। अर्जुन को इस बात का जब पता चला की दूसरी चिता पे उनको जलाया जायेगा ,तो अर्जुन उस बात का विरोध करने लगा। उस समय प्रधान और प्रजा अर्जुन को समझाने लगे की ,हमारे राज्य का नियम हे की पत्नी के मृत्यु के बाद पतिको पत्नी के साथ जिन्दा जलाया जाता हे।→प्रजा की बात सुनकर अर्जुन प्रजा को बहोत समझाने का प्रयास किया की ये सब नियम गलत हे। अर्जुन प्रजा को बहोत समझाया पर कुछ परिणाम न मिला। अब अर्जुन बचने के लिए युक्ति सोचने लगा ,और एक युक्ति समज में आयी। अर्जुन ने अपनी प्रजा को कहा की आपकी बातो से मुझे कोई चिंता नहीं हे ,पर मुझे पहले नदी में एक बार स्नान करने की अनुमति दी जाय। अपने आप को बचाने के प्रयास के साथ उस समय अर्जुन श्री कृष्णा को बहोत ही याद करने लगा।→अर्जुन जब स्नान करके लिए नदी में डुबकी लगाई और पानी में कुछ ज्यादा समय रहने का प्रयास किया। उस समय प्रजा की आवाज अर्जुन को भयभीत कर रही थी। उनको पकड़ो पकड़ो कही भाग न जाए ऐसी प्रजा की आवाज अर्जुन को सुनाई देने लगी। किन्तु परन्तु अर्जुन पानी के अंदर आखिर कितने समय तक रह सकता हे। और अर्जुन पानी के अंदर से अपना मुख बहार निकाला और आखिर सोचने लगा की अब तो मरना निश्चित हे।→जैसे ही अर्जुन पानी के अंदर से बहार निकलता हे ,और अर्जुन नदी के आसपास देखा तो उनके मुँह से ये सवाल निकल गया ,ये क्या हे ?नदी के आसपास न तो प्रजा थी ,न रानी का शब ,न श्मशान घाट। और कुछ ज्यादा समय अर्जुन सोचता उसी समय भगवान श्री कृष्णा पानी के अंदर से बहार निकलते हे ,और अर्जुन से कहते हे की हे अर्जुन तुम हार गये और में जित गया।→अर्जुन बहोत ही आश्चर्य में पड़ गया। सालो तक राज किया। साथ में पत्नी ,पुत्रो ,प्रजा ये सब क्या था ?भगवान श्री कृष्णा अर्जुन की परेशानी जानने के बाद भी बार बार यही बात दोहराते थे की ,अर्जुन आप शर्त हार गये और में शर्त जित गया। श्री कृष्णा अर्जुन से कहने लगे बहोत स्नान कर लिए ,अब घर जाते हे,मुझे बहोत भूख लगी हे। घर पहोचते ही भगवान श्री कृष्णा मंद मंद मुस्काते हुई भोजन ग्रहण कर रहे थे और अर्जुन अभी भी गहरी सोच में था की ये सब क्या था ?→थोड़ी देर भोजन करने के बाद अर्जुन बहोत ही दुखी था। अर्जुन ने श्री कृष्णा को अपनी आपबीती सुनाई। उसके बाद भगवान श्री कृष्णा मंद मंद मुस्काते हुई अर्जुन से कहते हे ये सब माया हे। ये सब मेरी माया का दर्शन था। अर्जुन श्री कृष्णा से कहता हे की आपको मुझे अपनी माया ही दिखानी थी तो पहले मुझे एक बार कह तो दिया होता ,में कैसे मान लू की ये सब माया थी ? →श्री कृष्णा फिर मुस्काते हे और अर्जुन से कहते हे की ,हे अर्जुन थोड़ी क्षण के लिए फिर से अपनी आँख बंध कर दे ,तुजे फिर से मेरी माया का दर्शन हो जायेगा। अर्जुन जैसे ही आँख बंध करता हे वो स्वयं को स्मशान घाट पे पाया महसूस करता हे। और अर्जुन को पकड़ो कही भाग न जाये ऐसी प्रजा की आवाज सुनाई देती हे। अर्जुन फिर से गभराह जाता हे और आँख खोल देता हे तब श्री कृष्णा फिर मंद मंद मुस्काते हे।→अर्जुन बहोत डर जाता हे और कहता हे की भगवान मुझे आपकी माया का दर्शन नहीं करना हे ,मुझे आपकी शरण चाहिए। भगवान श्री कृष्णा भी अर्जुन के मस्तक पे हाथ रखकर आशीर्वाद देते हे और साथ में ये भी कहते हे की में सदा अपने भक्तो के साथ ही रहता हु ,में कभी भक्तो का साथ नहीं छोड़ता। जय श्री कृष्णा
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