Element contemplation333: ओमकार परमेश्वर: जब अनन्त विश्व मे कुछ भी नही था, वो जो कुछ भी नही था वो भी में(ॐ) ही था....आज अनन्त विश्व मे जो कुछ भी है,वो जो जो कुछ भी है वो भी में(ॐ)...
Wednesday, 31 July 2019
Element contemplation333: होली
Element contemplation333: होली: →होली शब्द सुनते ही कई लोगो को शोले फिल्म का डायलॉग याद आ जाता हे।शोले फिल्म में डाकू गब्बर सिंग बार बार यह कहता हे,होली कब हे? या कब...
Element contemplation333: आध्यात्मिकता
Element contemplation333: आध्यात्मिकता: नमस्कार... ॐ नमः शिवाय.....पहले के जमाने मे दूसरे देशों के लोग आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत का प्रवास करते थे.....भारत देश पहले आध्यात...
Tuesday, 30 July 2019
आध्यात्मिकता
नमस्कार... ॐ नमः शिवाय.....पहले के जमाने मे दूसरे देशों के लोग आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत का प्रवास करते थे.....भारत देश पहले आध्यात्मिक ज्ञान,योग विज्ञान से विश्व मे प्रचलित था, जो और किसी बात से मूल्यवान बात थी....हमारे आधुनिक लोग ने योग और आध्यात्मिक ज्ञान को महत्व नही दिया....... भूतकाल में बुद्ध, यु ऐन संग जैसे लोग भारत आये थे ,आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में,बुद्ध और यू ऐन संग ने भारत मे आध्यात्मिक ज्ञान लिया... बाद में यु ऐन संग चीन में वापस जाकर पूरे चीन में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार किया.......बुद्ध ने भी आध्यात्मिक ज्ञान का अपने शिष्यों के जरिये पूरे विश्व मे प्रचार किया..............भारत देश आध्यात्मिक देश है......पर आधुनिक लोग हमारे भारत देश की आध्यात्मिक संस्कृति को भुलाते जा रहे है......योग,जप,तप,व्रत,ध्यान,नीति नियम ये सब खोज भारत देश की संस्कृति की है........मन की स्थिति पर निर्भर है आध्यात्मिक ज्ञान...........भले आध्यात्मिक ज्ञान आज अलग अलग भाषा मे है,जो पहले एक भाषा मे था.......लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान भाषाकीय विषय नही है...आध्यात्मिक विज्ञान एक क्रिया है....जैसे योग,ध्यान, तप,जप,व्रत ...जप,तप,व्रत , योग, ध्यान से मनुष्य की शरीर, मन और आत्मा की शक्ति जागृत होती है..लेकिन अभ्यास प्रतिदिन होना जरूरी है....जिंदगी सरल है...सरल विचारो से जीना चाहिए.... और व्यवहार भी सरल रखना चाहिए..हर इंसान के जीवन का समय बहोत ही सीमित होता है...बचपन,जवानी,पारिवारिक जीवन, वृद्धा अवस्था...ये चार अवस्था मे से पहले तीन अवस्था का समय एक बार चला गया दोबारा लॉट के नही आता....इसलिए अपने समय को पहचान के हर मनुष्य को चलना चाहिए.....समय का सही उपयोग करना चाहिए....अच्छे अभ्यास और स्वाध्याय, ध्यान ,योग से...ये सब शब्द उच्च लेवल के शब्द है.….आध्यात्मिकता खोजने और महसूस,अनुभव करने का विषय है.....सही तरीके से,नीति नियम से.....सही नीति नियम अपनाये तो परमात्मा अपने अंदर ही मिल जाता है.......
Thursday, 18 July 2019
ओमकार परमेश्वर
जब अनन्त विश्व मे कुछ भी नही था, वो जो कुछ भी नही था वो भी में(ॐ) ही था....आज अनन्त विश्व मे जो कुछ भी है,वो जो जो कुछ भी है वो भी में(ॐ) ही हु.... में(ॐ) ही आदि हु, में(ॐ) ही अनन्त हु........ ॐ नमः शिवाय......में(ॐ) ही त्रिदेव हु........में ही (ओम) सृष्टि का रचियता, में ही (ओम) पालनकर्ता और में ही (ओम) संहारकर्ता हु................में (ओम) ही 33 कोटि देवी देवता हु......... अनन्त विश्व की हर व्यवस्था मुझसे(ओम) से हे........में (ओम) अनन्त विश्व के कण कण में(ओम) हु....... सभी तत्वों में मे(ओम) ही हु..... अनन्त विश्व (ओम) मुझमे में और में (ओम) अनन्त विश्व मे.........अनन्त विश्व को चलाने वाला और नियंत्रण कर्ता में (ओम) ही हु.......(ओम) में ही जन्म,जीवन और मृत्य हु..........(ओम)में ही आत्मा हु और परमात्मा भी में (ओम) ही हु............अंत मे अनन्त विश्व मे जो कुछ भी है वो में (ओम) ही हु............जो मुझे(ओम) पा लेता है,समझ लेता है उसे कुछ और पाने की या समझने की जरूरत नही है,क्योकि (ओम) में ही अनन्त ज्ञान और अंनत उर्जा है............हर जीव में ओमकार ध्वनि की ऊर्जा है,उसे समझने ने के लिए,अनुभव करने के लिये ध्यान की जरूरत होती है.............ध्यान, योग से ही हर मनुष्य ओमकार ध्वनि की ऊर्जा को पा सकता है.........मनुष्य को ध्यान योग शिखवा चाहिए...ध्यान योग से शरीर, मन और आत्मा का एक अच्छा चरित्र निर्माण होगा.......... ॐ नमः शिवाय
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कविता पाठ
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