एक समय ऐसा था की ,पृथ्वी पर चारो ओर चारो दिशाओ में सिर्फ कुदरती संपत्ति थी।
जंगल=छोटी बड़ी वनस्पति ,पानी=कुदरती नदिया, झरने,तालाब या सरोवर,समुद्र,छोटे बड़े पहाड़,शिखर।धरती पर चारो दिशा ओ में केवल कुदरती संपत्ति ।
उस समय में धरती पर असंख प्राणी रहते थे।उस समय सभी जीवों का स्वभाव,क्रिया,आहार,विहार,वर्तन लगभग एक समान था।आज के जंगल के प्राणियों का जो जीवन होता है वैसा ही जीवन आदिमानव काल में पृथ्वी पर सभी जीवों का होता था।
उदाहरण से अगर देखा जाए तो,आज के जंगल के पशु और पक्षी ओ का जो दिनचर्या है,बस वही दिनचर्या उस समय के आदिमानव के समय की थी।
तो प्रश्न यही होता है की प्राणी विभाग में केवल मनुष्य का विकास क्यों सबसे बेहतर दिखाई देता हैं?अन्य प्राणियों का शारीरिक और मानसिक विकास मनुष्य की तरह क्यों नहीं हुआ?
आदिमानव शुरुआती समय में कैसा जीवन जीते थे?खुराक खाने- पीने,रहने,पहनने की व्यवस्था क्या थी उस समय?
शरुआती समय में विकास शून्य था आदिमानवों का,तो मनुष्य का शारीरिक और मानसिक विकास कैसे हुआ?
आदिमानवों के विकास की यात्रा जंगल में आग लगने के कारण हुई थी।जब जंगल में पहली बार आग लगी तब जंगल के सभी प्राणी,पक्षी इधर उधर भागने लगे । सभी आदिमानव भी भागने लगे।
भागते भागते कुछ आदिमानव गुफा के अंदर पहुंच गए और आग से बच गई।
जब जंगल में आग बुझ गई तो बाहर निकले और जंगल में पहली बार जला हुआ भोजन खाया आदिमानवो ने।
बस उस समय से ही आदिमानव के शारीरिक और मानसिक विकास का आरंभ हुआ ।
1, रहने के लिए घर=गुफा मिल गई और 2 खाने के लिए भोजन।