Monday, 5 August 2019

कुदरती आपत्ति


कुदरती आपत्ति क्या है?और क्यो आती है कुदरती आपत्ति?......इसका एक ही जवाब है कुदरती संपत्ति का नुकसान....जहाँ कुदरती संपत्ति का नुकसान हुवा हो वहाँ कुदरती आपत्ति आती है...जंगल, वन्य प्राणी, वन्य पक्षी, पहाड़,नदी,सरोवर, समुद्र, सूक्ष्म जीव, छोड़,वृक्ष आदि सभी जीव पृथ्वी की कुदरती संपत्ति है...मनुष्य ने अपने स्वार्थी प्रवृत्ति से जाने अनजाने में कुदरती संपत्ति का नुकसान किया है,खास करके वृक्ष का भारी मात्रा में नुकसान किया...आज पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग का खतरा दिन प्रति दिन बढ़ रहा है,ग्लोबल वार्मिंग के खतरे का जिम्मेदार आज के समय के मनुष्य ही है.....कुदरत ने हमे इस पृथ्वी के लिये जो कुदरती संपत्ति उपहार में दी है,उस संपत्ति का बहोत नुकसान आज के समय मे हो रहा है.....आज मनुष्य भौतिक उपलब्धि के पीछे भाग रहा है, लेकिन आनेवाली पेढ़ी बगैर अच्छे वातावरण, पर्यावरण से कैसे तंदुरुस्त जीवन जी पायेगी?.........आज के समय मे इस पृथ्वी के मनुष्य को अपनी आनेवाले पेढ़ी के लिये कुदरती संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए...........आज पूरे विश्व के अलग अलग देश में अलग अलग कुदरती आपत्ति हो रही है....किसी जगह भूकंप तो किसी जगह सुनामी,किसी जगह भारी बारिश तो किसी जगह बहोत ही कम बारिश, किसी जगह पर्यावरण के तापमान में गर्मी का प्रणााम खूब बढ़ता है तो किसी जगह तापमान कम होना.......सच कहे तो कुदरती संपत्ति के बगैर मनुष्य के साथ दूसरे पशु ,पक्षिओ का जीवन का पनपना या जीवन जीना असंभव हे...जल  जीवसृष्टि की प्यास बुझाता  हे और वृक्ष हवा के साथ छाव,लकड़ी,फल,फूल,अनाज और सब से जरुरी ऑक्सीजन देता हे.. हमे मनुष्य को कुदरत का दिया हुवा उपहार को नुकशान नहीं पहुँचाना  चाहिए...पृथ्वी पे आज के समय मे जंगल कम हो रहे हे ,उनके साथ गावो का शहरीकरण हो रहा हे...इस वजह से इस पृथ्वी पर वृक्ष धीरे धीरे कम हो रहे हे... इनका नुकशान हमारी आनेवाली पेढ़ी को होगा... इस पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिक नाम का भयंकर खतरा बढ़ रहा हे ,जो आगे आनेवाले समय में इस पृथ्वी पे जीवसृष्टि का पनपना मुश्किल कर देंगा...मनुष्य को अब समझना  होगा की इस पृथ्वी पर जीवसृष्टि के विकास के लिए कुदरती संपत्ति कितनी आवश्यक हे...........नमस्कार

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