kartikey45: कुदरती संपत्ति: →आज के समय में इस पृथ्वी पर मनुष्य सब से विकसित प्राणी कहलाता हे ,क्योकि इस पृथ्वी पर मनुष्य जैसी शारीरिक और मानसिक रचना अन्य प्राणी में ...
Sunday, 31 March 2019
Thursday, 28 March 2019
कुदरती संपत्ति
→आज के समय में इस पृथ्वी पर मनुष्य सब से विकसित प्राणी कहलाता हे ,क्योकि इस पृथ्वी पर मनुष्य जैसी शारीरिक और मानसिक रचना अन्य प्राणी में नहीं हे। कुदरत ने हम मनुष्य को बहुत सारी वस्तुएँ उपहार में दी हे, कुदरत के दिए उस उपहार को हम कुदरती संपत्ति भी कह सकते हे। कुदरती प्रकृति के सांनिध्य में रहकर समग्र जीवसृष्टि फलती-फूलती हे। उसका रसास्वाद कर जीवन व्यतीत करती हे। मनुष्य को जीवन जीने के लिए भौतिक सुख सुविधा के साथ हवा ,पानी ,आग या अग्नि,खुराक और पहनने के लिए वस्त्र की जरुरत पड़ती हे ,उससे विपरीत अन्य जिव जैसे की वन्य प्राणिओ ,जिव-जंतु और पंछीओ को वृक्ष, खुला आकाश ,जंगल ,नदी,तलाव,समुद्र ,पहाड़ जैसे कुदरती प्राकृतिक स्थान की जरुरत रहती हे। कुदरत ने प्रचुर मात्रा में इन सभी का आविष्कार किया हे। परंतु आधुनिक विज्ञानं की खोजो की तरह मनुष्य के बढ़ते चरण से पृथ्वी पर इन कुदरती संपत्तियों का संतुलन बिगड़ गया हे। हमारी जीवसृष्टि के लिए कुदरती संपत्ति का होना बेहद जरुरी हे,खास तोर पे वृक्ष और पानी का महत्व बहोत हे। जीवसृष्टि के लिए जल और वृक्ष एक कुदरती शक्ति हे या बल हे ,क्योंकि वृक्ष से जीवसृष्टि को ऑक्सीजन मिलता हे और जल से तो जीवसृष्टि अपनी सभी आवश्यकताएँ पूर्ण कर सकती हे। पानी का उपयोग वन्य प्राणी,पशु -पक्षी और मनुष्य पानी पिने के लिए करता हे।मनुष्य जिव को पानी की जरुरत अन्य वन्य पशु ,पक्षी से कुछ ज्यादा हे ,मनुष्य पानी पिने के साथ,खेतो के लिए,औद्योगिक कारखाने चलाने के लिए और घरेलु रसोई बनाने के लिए पानी बहोत जरुरी हे। सोचो अगर इस पृथ्वी पर वृक्ष,जल या पानी नहीं होता तो ये जीवसृष्टि नहीं होती। पानी के बगैर हमे खाने के लिए अनाज और पहनने के लिए वस्त्र नहीं मिलते। सच में कुदरती संपत्ति के बगैर जीना असंभव हे ।→सच कहे तो कुदरती संपत्ति के बगैर मनुष्य के साथ दूसरे पशु ,पक्षिओ का जीवन का पनपना या जीवन जीना असंभव हे। जल जीवसृष्टि की प्यास बुझाता हे और वृक्ष हवा के साथ छाव,लकड़ी,फल,फूल,अनाज और सब से जरुरी ऑक्सीजन देता हे। हमे मनुष्य को कुदरत का दिया हुवा उपहार को नुकशान नहीं पहुँचाना चाहिए। पृथ्वी पे आज के समय मे जंगल कम हो रहे हे ,उनके साथ गावो का शहरीकरण हो रहा हे। इस वजह से इस पृथ्वी पर वृक्ष धीरे धीरे कम हो रहे हे। इनका नुकशान हमारी आनेवाली पेढ़ी को होगा। इस पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिक नाम का भयंकर खतरा बढ़ रहा हे ,जो आगे आनेवाले समय में इस पृथ्वी पे जीवसृष्टि का पनपना मुश्किल कर देंगा। मनुष्य को अब समझना होगा की इस पृथ्वी पर जीवसृष्टि के विकास के लिए कुदरती संपत्ति कितनी आवश्यक हे।
Friday, 22 March 2019
खोज
भगवान शब्द सुनते ही एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव मन में अंकुरित होता हे।इस समग्र ब्रह्माण्ड को किस ने बनाया हे ?ये सवाल पृथ्वी पे हर व्यक्ति को होता हे,लेकिन अभी तक मनुष्य पुरे ब्रह्माण्ड को नहीं समज सका तो भला उनके सर्जनहार भगवान को कैसे समझेगा?ब्रह्माण्ड अनंत हे उनको समझना इतना आसान नहीं हे ,वैसी ही बात भगवान पे भी लागु होती हे। भगवान और ब्रह्माण्ड शब्द दोनों एक दूसरे से जुड़े हे ये हम कह सकते हे। इस पृथ्वी पे वैज्ञानिक लोग ब्रह्माण्ड को खोजने में और समझने में लगे हुई हे ,और ब्रह्माण्ड को समझने में सफल भी हुई हे। इसी तरह आध्यात्मिक लोग भी भगवान को खोजने और समझने में अंशतः सफल भी हुई हे। →
Wednesday, 20 March 2019
होली
→होली शब्द सुनते ही कई लोगो को शोले फिल्म का डायलॉग याद आ जाता हे।शोले फिल्म में डाकू गब्बर सिंग बार बार यह कहता हे,होली कब हे? या कब हे होली?शोले फिल्म में होली त्यौहार का एक मधुर गीत दर्शाया गया हे ,उस गीत में वीरू ,बसंती और पूरा गांव शामिल होकर,''होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं,गीले शिकवे भूल के दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते हैं'' गीत में बहोत नाचते हे गांव के लोग या यु कहे तो होली का उत्सव मनाते हे।→ये बात हुई फ़िल्मी होली की लेकिन भारत देश में अलग अलग राज्य के अलग अलग गांव के लोग भी होली का उत्सव बड़े ख़ुशी, आनंद,उल्लास,जोश से मनाते हे। भारत देश के भिन्न भिन्न राज्य के लोग अपनी अपनी संस्कृति के अनुसार होली का त्योहार मनाते हैं।→भारत देश के लिए होली एक धार्मिक और आध्यात्मिक उत्सव हे। होली का त्यौहार देवी शक्तिओ का आसुरी शक्ति पर विजय का त्यौहार भी कह सकते हे।→पुरातन समय में हिरण्यकश्यप नाम का असुर था ,वो देवी-देवताओ का दुश्मन था,खास करके भगवान नारायण को परम शत्रु वो मानता था। दुर्भाग्य के वश असुर हिरण्यकश्यप के वहाँ एक पुत्र पैदा हुवा ,उस पुत्र का नाम प्रहलाद था। प्रहलाद जब बड़ा हुवा तो वो भगवान विष्णु की भक्ति करने लगा। ये बात जब हिरण्यकश्यप को पता चली तो वो अपने पुत्र पे क्रोधित हो उठे। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मृत्युदंड की सजा सुना दी। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका आयी ,उसको भगवान ब्रह्मा ने आग में न जलने का वरदान दिया था। वो आग में प्रहलाद को लेकर बैठ गई ,लेकिन प्रहलाद की विष्णु भक्ति के आगे उनकी शक्ति नहीं चली, होलिका की मृत्यु हो गई और प्रहलाद बच जाता हे।हिरण्यकश्यप के सैनिक ले जाते हे प्रहलाद को मारने को लिए ,लेकिन प्रहलाद की विष्णु भक्ति इतनी प्रखर थी की अग्नि उसे जला न सकी ,गरम तेल भी उसे जला न सका , पहाड़ से भी फैका था प्रहलाद को तो भी भगवान विष्णु की भक्ति ने प्रहलाद को बचा लिया। अंत में भगवान विष्णु साक्षात प्रकट होते हैं नरसिंह अवतार लेके असुर हिरण्यकश्यप को मार देते हे और भक्त प्रहलाद को बचा लेते हे।ये कहानी हुई न असत्य पर सत्य की विजय,प्रहलाद की विष्णु भक्ति के आगे आसुरी शक्ति हार गई। उस समय के लोग प्रहलाद को जीवित देखकर आनंद उल्लास से नाचने लगे और उत्सव मनाने लगे। आगे जाके ये उत्सव होलिका दहन के नाम से जाने लगा।
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कविता पाठ
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