नमस्कार... ॐ नमः शिवाय.....पहले के जमाने मे दूसरे देशों के लोग आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत का प्रवास करते थे.....भारत देश पहले आध्यात्मिक ज्ञान,योग विज्ञान से विश्व मे प्रचलित था, जो और किसी बात से मूल्यवान बात थी....हमारे आधुनिक लोग ने योग और आध्यात्मिक ज्ञान को महत्व नही दिया....... भूतकाल में बुद्ध, यु ऐन संग जैसे लोग भारत आये थे ,आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में,बुद्ध और यू ऐन संग ने भारत मे आध्यात्मिक ज्ञान लिया... बाद में यु ऐन संग चीन में वापस जाकर पूरे चीन में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार किया.......बुद्ध ने भी आध्यात्मिक ज्ञान का अपने शिष्यों के जरिये पूरे विश्व मे प्रचार किया..............भारत देश आध्यात्मिक देश है......पर आधुनिक लोग हमारे भारत देश की आध्यात्मिक संस्कृति को भुलाते जा रहे है......योग,जप,तप,व्रत,ध्यान,नीति नियम ये सब खोज भारत देश की संस्कृति की है........मन की स्थिति पर निर्भर है आध्यात्मिक ज्ञान...........भले आध्यात्मिक ज्ञान आज अलग अलग भाषा मे है,जो पहले एक भाषा मे था.......लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान भाषाकीय विषय नही है...आध्यात्मिक विज्ञान एक क्रिया है....जैसे योग,ध्यान, तप,जप,व्रत ...जप,तप,व्रत , योग, ध्यान से मनुष्य की शरीर, मन और आत्मा की शक्ति जागृत होती है..लेकिन अभ्यास प्रतिदिन होना जरूरी है....जिंदगी सरल है...सरल विचारो से जीना चाहिए.... और व्यवहार भी सरल रखना चाहिए..हर इंसान के जीवन का समय बहोत ही सीमित होता है...बचपन,जवानी,पारिवारिक जीवन, वृद्धा अवस्था...ये चार अवस्था मे से पहले तीन अवस्था का समय एक बार चला गया दोबारा लॉट के नही आता....इसलिए अपने समय को पहचान के हर मनुष्य को चलना चाहिए.....समय का सही उपयोग करना चाहिए....अच्छे अभ्यास और स्वाध्याय, ध्यान ,योग से...ये सब शब्द उच्च लेवल के शब्द है.….आध्यात्मिकता खोजने और महसूस,अनुभव करने का विषय है.....सही तरीके से,नीति नियम से.....सही नीति नियम अपनाये तो परमात्मा अपने अंदर ही मिल जाता है.......
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कविता पाठ
में बहुत खुश हु। तो भी में खुश नहीं हु। में बहुत दुखी हु। तो भी में दुखी नही हु। में बहुत परेशान हु। तो भी में परेशान नही हु। में बहुत आनंद ...
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