ईश्वर एक प्रकृति है...कुदरती संपत्ति देवी देवता है...जहां अच्छा पर्यावरण वातावरण होगा वहाँ सुख शांति आंनद का अनुभव होगा..... ॐ नमः शिवाय........मनुष्य का स्वभाव कब ,कहा बदल जाये,उनका पता नही चलता..... आज जो अच्छे विचारों से जीवन जी रहा है...कल वो विपरीत विचारो से जीने लगें .....तो उनको हम देवता नही कह सकते......... देवता वो है जैसे, पानी,अग्नि,हवा जो अपने गुण कभी नही छोड़ते इसलिए हम उसे देवता कहते है.......मनुष्य को शरीर,मन और आत्मा का विकास करना चाहिये... ध्यान, योग, कसरत से,योग्य आहार विहार से,अच्छे आचरण से........इससे.... मनुष्य देवता तो नही बन सकता पर महानता के शिखरों तक जरूर पहोच सकता है................देवी देवता एक पद है,स्थान है ,वहां परमात्मा ही पहोच सकता है.... जो आत्मा परमात्मा बनने के लायक है वो देवी देवता के पद स्थान पर जरूर पहोंचेगा.......कर्म पर ही आधारित है अंनत विश्व ,जैसा कर्म होगा फल भी वैसा होगा......भगवान ने अन्नत विश्व बनाया..... अगर मनुष्य चाहे तो अच्छे कर्म करके देवता बन सकता है(जैसे राम, कृष्ण).....मनुष्य चाहे तो बुरे कर्म करके वो राक्षस भी बन सकता है(जैसे रावण, कंस,हिरण्यकश्यप)......राम,कृष्ण, रावण सब ने शिव कि ही भक्ति ,तपस्या की थी.....लेकिन कृष्ण और राम ने अपने अच्छे कर्म से देवता बने...और रावण अपने बुरे कर्म और आचरण से राक्षस बने......कर्म के फल का सिंद्धांत हमेशा मौजूद है .
Saturday, 10 August 2019
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कविता पाठ
में बहुत खुश हु। तो भी में खुश नहीं हु। में बहुत दुखी हु। तो भी में दुखी नही हु। में बहुत परेशान हु। तो भी में परेशान नही हु। में बहुत आनंद ...
-
नमस्कार... ॐ नमः शिवाय.....पहले के जमाने मे दूसरे देशों के लोग आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत का प्रवास करते थे.....भारत देश पहले आध्यात...
-
गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी(नेपाल) स्थित जगह कपिलवस्तु नाम के राज्य में हुवा था।गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था,सिद्धा...
-
कुदरती आपत्ति क्या है?और क्यो आती है कुदरती आपत्ति?......इसका एक ही जवाब है कुदरती संपत्ति का नुकसान....जहाँ कुदरती संपत्ति का नुकसा...

No comments:
Post a Comment