→आज के समय में इस पृथ्वी पर मनुष्य सब से विकसित प्राणी कहलाता हे ,क्योकि इस पृथ्वी पर मनुष्य जैसी शारीरिक और मानसिक रचना अन्य प्राणी में नहीं हे। कुदरत ने हम मनुष्य को बहुत सारी वस्तुएँ उपहार में दी हे, कुदरत के दिए उस उपहार को हम कुदरती संपत्ति भी कह सकते हे। कुदरती प्रकृति के सांनिध्य में रहकर समग्र जीवसृष्टि फलती-फूलती हे। उसका रसास्वाद कर जीवन व्यतीत करती हे। मनुष्य को जीवन जीने के लिए भौतिक सुख सुविधा के साथ हवा ,पानी ,आग या अग्नि,खुराक और पहनने के लिए वस्त्र की जरुरत पड़ती हे ,उससे विपरीत अन्य जिव जैसे की वन्य प्राणिओ ,जिव-जंतु और पंछीओ को वृक्ष, खुला आकाश ,जंगल ,नदी,तलाव,समुद्र ,पहाड़ जैसे कुदरती प्राकृतिक स्थान की जरुरत रहती हे। कुदरत ने प्रचुर मात्रा में इन सभी का आविष्कार किया हे। परंतु आधुनिक विज्ञानं की खोजो की तरह मनुष्य के बढ़ते चरण से पृथ्वी पर इन कुदरती संपत्तियों का संतुलन बिगड़ गया हे। हमारी जीवसृष्टि के लिए कुदरती संपत्ति का होना बेहद जरुरी हे,खास तोर पे वृक्ष और पानी का महत्व बहोत हे। जीवसृष्टि के लिए जल और वृक्ष एक कुदरती शक्ति हे या बल हे ,क्योंकि वृक्ष से जीवसृष्टि को ऑक्सीजन मिलता हे और जल से तो जीवसृष्टि अपनी सभी आवश्यकताएँ पूर्ण कर सकती हे। पानी का उपयोग वन्य प्राणी,पशु -पक्षी और मनुष्य पानी पिने के लिए करता हे।मनुष्य जिव को पानी की जरुरत अन्य वन्य पशु ,पक्षी से कुछ ज्यादा हे ,मनुष्य पानी पिने के साथ,खेतो के लिए,औद्योगिक कारखाने चलाने के लिए और घरेलु रसोई बनाने के लिए पानी बहोत जरुरी हे। सोचो अगर इस पृथ्वी पर वृक्ष,जल या पानी नहीं होता तो ये जीवसृष्टि नहीं होती। पानी के बगैर हमे खाने के लिए अनाज और पहनने के लिए वस्त्र नहीं मिलते। सच में कुदरती संपत्ति के बगैर जीना असंभव हे ।→सच कहे तो कुदरती संपत्ति के बगैर मनुष्य के साथ दूसरे पशु ,पक्षिओ का जीवन का पनपना या जीवन जीना असंभव हे। जल जीवसृष्टि की प्यास बुझाता हे और वृक्ष हवा के साथ छाव,लकड़ी,फल,फूल,अनाज और सब से जरुरी ऑक्सीजन देता हे। हमे मनुष्य को कुदरत का दिया हुवा उपहार को नुकशान नहीं पहुँचाना चाहिए। पृथ्वी पे आज के समय मे जंगल कम हो रहे हे ,उनके साथ गावो का शहरीकरण हो रहा हे। इस वजह से इस पृथ्वी पर वृक्ष धीरे धीरे कम हो रहे हे। इनका नुकशान हमारी आनेवाली पेढ़ी को होगा। इस पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिक नाम का भयंकर खतरा बढ़ रहा हे ,जो आगे आनेवाले समय में इस पृथ्वी पे जीवसृष्टि का पनपना मुश्किल कर देंगा। मनुष्य को अब समझना होगा की इस पृथ्वी पर जीवसृष्टि के विकास के लिए कुदरती संपत्ति कितनी आवश्यक हे।
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