जब अनन्त विश्व मे कुछ भी नही था, वो जो कुछ भी नही था वो भी में(ॐ) ही था....आज अनन्त विश्व मे जो कुछ भी है,वो जो जो कुछ भी है वो भी में(ॐ) ही हु.... में(ॐ) ही आदि हु, में(ॐ) ही अनन्त हु........ ॐ नमः शिवाय......में(ॐ) ही त्रिदेव हु........में ही (ओम) सृष्टि का रचियता, में ही (ओम) पालनकर्ता और में ही (ओम) संहारकर्ता हु................में (ओम) ही 33 कोटि देवी देवता हु......... अनन्त विश्व की हर व्यवस्था मुझसे(ओम) से हे........में (ओम) अनन्त विश्व के कण कण में(ओम) हु....... सभी तत्वों में मे(ओम) ही हु..... अनन्त विश्व (ओम) मुझमे में और में (ओम) अनन्त विश्व मे.........अनन्त विश्व को चलाने वाला और नियंत्रण कर्ता में (ओम) ही हु.......(ओम) में ही जन्म,जीवन और मृत्य हु..........(ओम)में ही आत्मा हु और परमात्मा भी में (ओम) ही हु............अंत मे अनन्त विश्व मे जो कुछ भी है वो में (ओम) ही हु............जो मुझे(ओम) पा लेता है,समझ लेता है उसे कुछ और पाने की या समझने की जरूरत नही है,क्योकि (ओम) में ही अनन्त ज्ञान और अंनत उर्जा है............हर जीव में ओमकार ध्वनि की ऊर्जा है,उसे समझने ने के लिए,अनुभव करने के लिये ध्यान की जरूरत होती है.............ध्यान, योग से ही हर मनुष्य ओमकार ध्वनि की ऊर्जा को पा सकता है.........मनुष्य को ध्यान योग शिखवा चाहिए...ध्यान योग से शरीर, मन और आत्मा का एक अच्छा चरित्र निर्माण होगा.......... ॐ नमः शिवाय
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कविता पाठ
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