गुरुत्वाकर्षण शक्ति, बल कण कण में समाई हुई है।
वनस्पति और प्राणी की विशेषता भिन्न भिन्न है। गुण,विचार,आकार,प्रकार,स्वभाव,रंग,रूप, देखने ,सुनने,बोलने, समझने की दृष्टि,शक्ति भिन्न भिन्न है।
जीव विज्ञान= वनस्पति शास्त्र और प्राण शास्त्र
एक समान परिस्थिति में भी एक समान सोच रखने वाले विचार भी एक समान नही हो सकते।
दो असमान दृष्टि के विचारो में आकर्षण उत्पन्न होता है।दोनो एक दूसरे के विचारो का सम्मान भी करते हैं।
एक समान दृष्टि के विचारो के बीच दूरी उत्पन्न होती है।दोनो के बीच स्पर्धा होती है। सम्मान से ज्यादा स्पर्धा होने के कारण एक समान दृष्टि के विचारो के बीच में आकर्षण का अभाव दिखाई देता है
दो अलग क्षेत्र की अलग अलग विचार धारा में आकर्षण उत्पन्न होता है।
उदाहरण से देखा जाए तो
पसंद=आकर्षण और नापसंद,नही पसंद=अपकर्षण, अपा कर्षण
अच्छी आदतें,अच्छी बाते....अच्छी,अच्छा=आकर्षण
बुरी आदते,अच्छी न दिखने वाली बाते...=अपकर्षण , अपा कर्षण
दो असमान विषयो के बीच भी आकर्षण और सम्मान होता है।कारण यह है की दोनो के विषय अलग अलग है,इस कारण स्पर्धा नही होती ।
विरोधाभाषी शब्दो मे भी आकर्षण और सम्मान उत्पन्न होता है।
एक समान शब्दो में आकर्षण और सम्मान उत्पन्न नही होता।
गुरु और शिष्य दोनो असमान शब्द है,दोनो शब्द में सम्मान उत्पन्न होता है ।एक ज्ञान देने वाला,एक ज्ञान प्राप्त करने वाला।
एक समान गुणों में भी आकर्षण का अभाव दिखाई देता है ।
असमान गुणों में आकर्षण के साथ सम्मान भी उत्पन्न होता है।
अंत में समान गुण,समान प्रवृत्ति,परिस्थिति, समान विचार दृष्टि में आकर्षण का अभाव उत्पन्न होता है।
असमान गुण,कला,विषय, प्रवृत्ति,विचार दृष्टि में सम्मान के साथ आकर्षण भी उत्पन्न होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल ,शक्ति के कारण ही आसपास सबकुछ उत्पन्न होता है और दिखाई भी देता है।
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