में का कोई निश्चित स्वरूप नही है।
में अनुभव करता है,ज्ञान प्राप्त करता है -मन, बुद्धि, माइंड,दिमाग से ।
विचार करने की प्रक्रिया मानसिक प्रक्रिया है,जो दिखाई नही देती।
मानसिक प्रक्रिया मन,दिमाग,माइंड से जुड़ी प्रक्रिया है।
विचार करने की प्रक्रिया मन,बुद्धि से जुड़ी प्रक्रिया है।
में प्रश्न भी पूछता है मन बुद्धि से और उत्तर जवाब भी लेता है मन बुद्धि से?
में - मन,बुद्धि,दिमाग,माइंड से जुड़ा है,मानसिक प्रक्रिया के साथ में,स्व जुड़ा है।
में - मन से जुड़ा है -मानसिक प्रक्रिया
में - शरीर से भी जुड़ा है - शारीरिक प्रक्रिया
आंतरिक प्रक्रिया और बाह्य प्रक्रिया के साथ भी में जुड़ा हुआ है।
समय के साथ,
स्थान के साथ,
भी में जुड़ा है।
आध्यतिकता में - में, आत्मा के साथ भी जुड़ा हुआ है।
में ,बस अनुभव करता है।
समय,
स्थान,वातावरण, पर्यावरण,
सामाजिक,आर्थिक,
शारीरिक,मानसिक
आधायत्मिकता
विकास के साथ में या स्व जुड़ा हुआ है।
में देखने,देखना, समझना,अनुभव करने का कार्य करता है।
जो अनुभव करता है,समझता है ,देखता है - वो में, स्व है।
तो स्व,में का स्वरूप क्या हो सकता है?
No comments:
Post a Comment