Wednesday, 20 March 2019

होली


→होली शब्द सुनते ही कई लोगो को शोले फिल्म का डायलॉग याद आ जाता हे।शोले फिल्म में डाकू गब्बर सिंग बार बार यह कहता हे,होली कब हे? या कब हे होली?शोले फिल्म में होली त्यौहार का एक  मधुर गीत दर्शाया गया हे ,उस गीत में वीरू ,बसंती और पूरा गांव शामिल होकर,''होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं,गीले शिकवे भूल के दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते हैं'' गीत में बहोत नाचते हे गांव के लोग  या यु कहे तो होली का उत्सव मनाते  हे।→ये बात हुई फ़िल्मी होली की लेकिन भारत देश में अलग अलग राज्य के अलग अलग गांव के लोग भी होली का उत्सव  बड़े ख़ुशी, आनंद,उल्लास,जोश से मनाते हे। भारत देश के भिन्न भिन्न राज्य के लोग अपनी अपनी संस्कृति के अनुसार होली का त्योहार मनाते हैं।→भारत देश के लिए होली एक धार्मिक और आध्यात्मिक उत्सव हे। होली का त्यौहार देवी शक्तिओ का आसुरी शक्ति पर विजय का त्यौहार भी कह सकते हे।→पुरातन समय में हिरण्यकश्यप  नाम का असुर था ,वो देवी-देवताओ का दुश्मन था,खास करके भगवान  नारायण को परम शत्रु वो मानता था। दुर्भाग्य के वश असुर हिरण्यकश्यप के वहाँ एक पुत्र पैदा हुवा ,उस पुत्र का नाम प्रहलाद था। प्रहलाद जब बड़ा हुवा तो वो भगवान विष्णु की  भक्ति करने लगा। ये बात जब हिरण्यकश्यप को पता चली तो वो अपने पुत्र पे क्रोधित हो उठे।   हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मृत्युदंड की सजा सुना दी। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका आयी  ,उसको भगवान ब्रह्मा ने आग में न जलने का वरदान दिया था। वो आग में प्रहलाद  को लेकर बैठ  गई ,लेकिन प्रहलाद  की विष्णु भक्ति के आगे उनकी शक्ति नहीं चली, होलिका की मृत्यु हो गई  और प्रहलाद बच जाता हे।हिरण्यकश्यप के सैनिक ले जाते हे प्रहलाद को मारने को लिए ,लेकिन प्रहलाद की विष्णु भक्ति इतनी प्रखर थी की अग्नि उसे जला न सकी ,गरम तेल भी उसे जला न सका , पहाड़ से भी फैका था प्रहलाद को तो भी भगवान विष्णु की भक्ति ने प्रहलाद को बचा लिया। अंत में भगवान विष्णु साक्षात प्रकट होते हैं नरसिंह अवतार लेके  असुर हिरण्यकश्यप को मार देते हे और भक्त प्रहलाद को बचा लेते हे।ये कहानी हुई न असत्य पर सत्य की विजय,प्रहलाद की विष्णु भक्ति के आगे आसुरी शक्ति हार गई। उस समय के लोग प्रहलाद को जीवित देखकर आनंद उल्लास से नाचने लगे और उत्सव मनाने लगे। आगे जाके ये उत्सव होलिका दहन  के नाम से  जाने लगा। 

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कविता पाठ

में बहुत खुश हु। तो भी में खुश नहीं हु। में बहुत दुखी हु। तो भी में दुखी नही हु। में बहुत परेशान हु। तो भी में परेशान नही हु। में बहुत आनंद ...